जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई। **********************************************
by विजय संवादFriday, April 29, 2016
बिलकुल सच है , जब तक खुद दर्द ना हो तब तक दूसरे के दर्द का वो तीब्र अहसास नहीं हो पाता है। औरत होकर जीना संसार का सबसे बड़ा दुस्साध्य का ...Read More
