जब अंग्रेज कमिश्नर सर वाल्टर चार्ल्स रैण्ड के मनमानी और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए चाफेकर बन्धु दामोदर एवं बालकृष्ण ने 22 जून, 1897 को उसका वध कर दिया। एक साल के अंदर अंग्रेजों ने चाफेकर बंधुओं को फांसी पर चढ़ा दिया, फिर भी हमारे बिकाऊ इतिहासकारों को लगता है ये आजादी खड़ग बिना ढाल के मिल गया।
by विजय संवादThursday, February 09, 2017
स्वतंत्रता इतनी सस्ती नहीं कि चरखा घुमाया और सूत की तरह निकल आए। पुरखो ने लहू से सींचा था इस धरा को तब हम आजादी का फल चख पाए हैं। ...Read More
